लाल किताब के छिपे रहस्य लाल किताब का असली ज्ञान

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🟥 लाल किताब के छिपे रहस्य लाल किताब का असली ज्ञान  

गलत उपाय बन सकते हैं अकाल मृत्यु का कारण

  • लाल किताब में ऐसे कई रहस्य छिपे हैं।
  • हर एक लाइन के कई-कई मतलब निकलते हैं।
  • इंसान का जीवन भी कम पड़ सकता है इन रहस्यों को समझने और अप्लाई करने में।
  • इसके पीछे कोई ना कोई शक्ति अवश्य है।
    
लाल किताब के उपाय और रहस्य


ग्रहों का महत्व और सीमाएँ

  • हमारे सौर मंडल में सूर्य से लेकर शनि तक के ग्रहों को ही कुंडली में गिना गया है।
  • शनि के बाद वाले ग्रहों का चक्कर बहुत लंबा (80 साल+) होता है, इसलिए आम मानव जीवन में प्रभावशाली नहीं माने गए।
  • पृथ्वी बीच में आकर सभी ग्रहों की ऊर्जा को ग्रहण करती है।
  • इन्हीं ऊर्जा तरंगों से निर्जीव से लेकर सजीव वस्तुएं बनीं।

ग्रह और मानव जीवन

  • ग्रहों की ऊर्जा हमारी ओरा (Aura) बनाती है।
  • शरीर के हर अंग का संबंध किसी न किसी ग्रह से है।
  • पिछला जन्म और कर्म – सब ग्रहों के अनुसार संचालित होते हैं।
  • इंसान वास्तव में कुछ नहीं चला रहा, ग्रह ही जीवन को चला रहे हैं।

लाल किताब: एक अमृत विद्या

  • लाल किताब जीवन जीने की कला सिखाती है।
  • गुरु–शिष्य परंपरा से ही इसका असली ज्ञान मिलता है।
  • पंडित रूपचंद जोशी ने लाल किताब लिखी, पर इसे घर-घर पहुँचाने का श्रेय गुरुदेव जी डी वशिष्ठ जी को जाता है।

लाल किताब को समझना आसान नहीं

  • यह विद्या गहरी और सटीक है।
  • एक लाइन के अनेक अर्थ निकल सकते हैं।
  • 600 पन्नों की किताब को समझाने में गुरुदेव जी डी वशिष्ठ ने 5000+ पन्ने लिख डाले हैं।

कुर्बानी के बकरे का रहस्य

  • लाल किताब में "कुर्बानी के बकरे" का उल्लेख आता है।
  • उदाहरण:
    • यदि सूर्य, मंगल या बृहस्पति खराब हों तो कुर्बानी का बकरा केतु बनता है।
    • बीमारी पाइल्स की होगी (केतु की बीमारी), पर इलाज करना पड़ेगा खराब ग्रह (सूर्य/मंगल/बृहस्पति) का।

राहु–केतु: ब्रह्मांड की शक्ति

  • राहु–केतु को छाया ग्रह कहा जाता है।
  • लाल किताब कहती है – 7 ग्रह × 12 घर = 84 योनियाँ।
  • असली रहस्य:
    • राहु = हर ग्रह के घूमने की शक्ति।
    • केतु = सूर्य की परिक्रमा करने की शक्ति।
  • राहु विचार देता है, केतु कर्म करवाता है।
  • यही शक्ति पूरे ब्रह्मांड को चलाती है।

ग्रह और खान–पान

  • ग्रह खराब होने पर खाने–पीने की चीजें भी असर डालती हैं।
  • उदाहरण:
    • शनि खराब → काली दाल खाने से समस्या।
    • बुध खराब → मूंग या अंडा खाने से बीमारी।
  • डॉक्टर इलाज कर देगा, लेकिन प्रॉब्लम बार-बार आएगी।

लाल किताब: प्रैक्टिकल ज्योतिष

  • इसमें लिखा हुआ हर शब्द सत्य और वैज्ञानिक है।
  • इसे समझना और प्रैक्टिकल में अप्लाई करना जरूरी है।
  • कोई भी ग्रह जीवन में काम करना बंद नहीं करता।
  • लाल किताब का 35 साल का चक्र:
    • 6 साल शनि,
    • 6 साल राहु,
    • 3 साल केतु,
    • 6 साल बृहस्पति,
    • 2 साल सूर्य,
    • 1 साल चंद्रमा,
    • 3 साल शुक्र,
    • 6 साल मंगल,
    • 2 साल बुध।

लाल किताब की कुंडलियाँ

  • इसमें दो प्रकार की कुंडली बनाई जाती हैं:
    1. जन्म कुंडली
    2. वर्षफल कुंडली
  • पहले वर्षफल कुंडली देखनी चाहिए।
  • लग्न चार्ट से प्रेडिक्शन 95% तक गलत हो सकती है।
  • वशिष्ठ कुंडली (गुरुदेव द्वारा बनाई गई) सबसे सटीक है।

लाल किताब और वास्तु

  • वास्तु वास्तव में आपकी कुंडली से जुड़ा है।
  • घर के अलग-अलग हिस्सों में ग्रहों की स्थिति स्वतः बनती है।
  • यदि ग्रह शुभ है → स्थिति रहने दें।
  • यदि ग्रह अशुभ है → वास्तु सुधार करना पड़ेगा।

लाल किताब क्यों कहलाती है लाल किताब?

  • यह नाम "खून" (लाल रंग) के आधार पर रखा गया।
  • सबसे पहले इसे तांबे की पट्टियों पर फारसी भाषा में लिखा गया था।
  • बाद में इसका अनुवाद हुआ और कई भाषाओं में अलग-अलग रूप मिलते हैं।

असली लाल किताब कौन सी है?

  • बाज़ार में कई लेखकों की किताबें हैं।
  • पंडित उमेश शर्मा जी की किताब काफी हद तक सटीक मानी जाती है।
  • लेकिन अनुवाद की वजह से छोटे-छोटे अंतर मिलते हैं।
  • असली ज्ञान गुरु परंपरा से ही मिलता है।

👉 लाल किताब में ग्रहों की दृष्टि और घरों की दृष्टि का अंतर

  • यदि किसी ग्रह के सामने (सातवें से बारहवें घर तक) कोई ग्रह न हो तो वह सोया हुआ ग्रह कहलाता है।
  • सोया हुआ ग्रह अपने फल को सामने वाले घर में नहीं देता।
  • जब सामने वाले घर में कोई ग्रह बैठा हो और उसका समय आए तो पहले वाला ग्रह भी असर डालता है।
  • यानी उस समय दोनों ग्रहों का असर मिलेगा।
  • सोए हुए ग्रह को जगाया भी जा सकता है, लेकिन विशेष शर्तों के साथ।

सोए हुए ग्रह को जगाने का उदाहरण

  • यदि आठवें घर में शनि बैठा हो और बारहवां घर खाली हो तो:
    • शनि बुढ़ापे में आँखों की खराबी देता है।
    • कमाई के मामलों में भी हानि करवाता है।
  • ऐसे में 12वां घर केतु से जागता है।
  • उपाय:
    • घर या मंदिर की छत पर काले-सफेद तिल पक्षियों के लिए डालें।
    • पक्षी आकर खाएँगे और उड़ जाएंगे, इससे 12वां घर जागेगा।
    • परिणाम: शनि का शुभ फल मिलने लगेगा।

⚠️ सावधानी: यदि छठे या पाँचवें घर में खराब ग्रह बैठा हो तो उसका नकारात्मक फल भी 12वें घर से टकराकर आपको प्रभावित कर सकता है।
👉 इसलिए ग्रह को जगाने से पहले पूरी कुंडली की कंडीशन्स देखना ज़रूरी है।


लाल किताब और सनातन धर्म

  • कुछ लोग इसे नेगेटिव मानते हैं, पर यह बिल्कुल भी नकारात्मक नहीं है।
  • "सनातन" का अर्थ:
    • "सना" = साइंस (विज्ञान)
    • "तन" = शरीर
    • यानी जो व्यक्ति विज्ञान के आधार पर अपने शरीर को चलाए, वह सनातनी कहलाता है।
  • लाल किताब को गहराई से पढ़ने वाला और समझने वाला व्यक्ति सनातनी पक्का होता है

ज्योतिष को बढ़ाने के उपाय

  • कमाई के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सेवा-भाव से पढ़ें।
  • लाल किताब को कम से कम 5–7 साल तसल्ली से पढ़ें।
  • गहरा ज्ञान पाने के बाद ही ज्योतिष सिखाएँ।
  • सुझाव:
    • स्कूलों में लाल किताब ज्योतिष एक विषय होना चाहिए।
    • पढ़ाने की अनुमति केवल योग्य और पारंगत ज्योतिषी को मिले।

संतान और गोचर का महत्व

  • संतानोत्पत्ति (Conceiving) भी गोचर देखकर होनी चाहिए।
  • सही समय पर गर्भधारण से ऐसे बच्चे जन्म लेते हैं जो आगे चलकर उच्च पदों पर पहुँचते हैं।
  • उन्हें बचपन से ही लाल किताब का ज्ञान दिया जाए।
  • इससे जब वे बड़ी पोस्ट पर बैठेंगे, तो लाल किताब का ज्ञान समाज तक पहुँचा सकेंगे।

सही ज्योतिषी की पहचान

  • किसी भी ज्योतिषी को खुद बोलने दें, क्लाइंट को कम बोलना चाहिए।
  • उसकी प्रेडिक्शन को टेस्ट करें।
  • यदि 10–20 कुंडलियों में सही उतरता है, तभी उसे योग्य मानें।

जागे हुए ग्रह का रहस्य

  • कई बार व्यक्ति का योग बहुत अच्छा होता है, लेकिन शादी या किसी कारण से सोया ग्रह जाग जाता है
  • उदाहरण:
    • शादी में सबसे पहले मंगल जागता है।
    • यदि मंगल वध अवस्था में हो और उसी समय राजयोग चल रहा हो, तो मंगल जागने से पूरा राजयोग खराब कर देता है।
  • इसलिए ग्रहों की नींद और जागरण को समझना बेहद आवश्यक है।

धोखे का ग्रह

  • किसी भी ग्रह से दसवें घर में बैठा ग्रह धोखे का ग्रह कहलाता है।
  • जब वर्षफल में यह सक्रिय होता है:
    • पॉजिटिव हो तो दोगुना लाभ देता है।
    • नेगेटिव हो तो दोगुना नुकसान, यहाँ तक कि मृत्यु भी संभव।

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के योग

  • पाँचवां घर = DNA, दिल, प्रेम, संतान और बॉडी के सेल्स।
  • पाँचवें घर में यदि खराब ग्रह हो तो:
    • पहले लव अफेयर करवाता है।
    • शादी के बाद भी अन्य संबंधों में फँसा सकता है।
  • विशेष योग:
    • सूर्य + बुध + शुक्र का मेल (खासकर आठवें घर में)।
    • केतु खराब हो तो भी शादी के बाद अफेयर की संभावना।
  • शुक्र पाँचवें घर में बहुत बुरा असर डालता है।
  • बृहस्पति पाँचवें घर में बैठकर भी कभी-कभी शुक्र का फल देता है।

उपायों की शक्ति और सीमा

  • उपाय 70–75% तक फल देते हैं।
  • उपाय जीवनभर करने पड़ते हैं।
  • यदि आप ग्रह से जुड़ी चीजें खाते-पीते रहेंगे तो उपाय का असर कम होगा।
  • यदि किसी ग्रह को अनजाने में जगा लिया हो तो उपाय कमजोर पड़ जाते हैं।

जब उपाय काम नहीं करते

  • जब ग्रह जागा हुआ हो और नकारात्मक असर दे रहा हो।
  • उस समय वर्षफल में जब वह ग्रह अपने घर में लौटेगा, तब बड़ा असर देगा:
    • पॉजिटिव → मालामाल करेगा।
    • नेगेटिव → नुकसान या संकट देगा।

आयुर्वेद और ज्योतिष का संबंध

  • केवल वही आयुर्वेदाचार्य असली है जो नाड़ी देखकर रोग पहचान सके
  • जैसे सही ज्योतिष ढूँढना ज़रूरी है, वैसे ही सही आयुर्वेदाचार्य ढूँढना भी उतना ही ज़रूरी है।

👉 🔖1. राजयोग और बुरा समय

  • यदि किसी की कुंडली में राजयोग है और फिर भी बुरा समय चल रहा है, तो कारण यही है कि उसी दौरान कोई खराब ग्रह जाग गया
  • इसीलिए बिना सोचे-समझे उपाय नहीं करने चाहिए।
  • रील्स या दिखावटी उपायों पर भरोसा नहीं करें। हमेशा किसी पारंगत ज्योतिषी से मिलकर ही उपाय करें।

2. पिछले जन्म के कर्म बनाम ग्रह

  • जब बच्चा जन्म लेता है, उसी समय ग्रह उसकी पूरी जीवन यात्रा तय कर देते हैं।
  • इसका अर्थ यह है कि पिछले जन्म के कर्म भी ग्रहों द्वारा ही नियंत्रित थे
  • अतः जीवन में कर्मों से अधिक कुंडली और ग्रहों की स्थिति मायने रखती है
  • समाधान → खराब ग्रहों का उपाय करें और उन्हें अनजाने में कभी जगाएँ नहीं

3. ज्योतिष और आयुर्वेद का संबंध

  • ज्योतिष और आयुर्वेद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
  • ज्योतिषीय उपाय से व्यक्ति 70–80% तक ठीक हो सकता है।
  • शेष 20% सुधार के लिए आयुर्वेदिक इलाज आवश्यक है।
  • यदि दोनों को साथ लेकर चला जाए तो व्यक्ति 100% स्वस्थ हो सकता है।

4. भूत-प्रेत का अस्तित्व

  • भूत-प्रेत की स्थिति केवल उन्हीं की कुंडली में बनती है, जिनके ग्रह ऐसे योग बनाते हैं।
  • उदाहरण:
    • केतु छठे घर में बृहस्पति के साथ → बहुत खतरनाक।
    • दूसरे या चौथे घर में अकेला बुध/मंगल → भ्रम, प्रेत बाधा।
  • अनुभव:
    • जिनकी कुंडली में योग है, उन्हें भूत-प्रेत घर में ही दिखाई देते हैं।
    • जिनकी कुंडली में योग नहीं है, उन्हें श्मशान घाट में बैठा दो, कुछ नहीं होगा।
  • समय: विशेषकर रात 3:30 से सूर्योदय तक

5. लाल किताब उपाय और उनकी शक्ति

  • उपाय बहुत शक्तिशाली हैं और साथ ही असर दिखाते हैं
  • परंतु → उपाय जीवनभर करने पड़ते हैं
  • यदि बीच में छोड़ दिए, तो ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा फिर से इकट्ठी हो जाएगी।

6. 43 दिन का फार्मूला

  • यदि किसी ग्रह की ऊर्जा तुरंत शांत करनी हो, तो 43 दिन लगातार उपाय करना होता है।
  • इसके बाद → साप्ताहिक या पखवाड़िक उपाय करना चाहिए।
  • 43 दिन उपाय करने से ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा तुरंत दब जाती है।

7. बहाना और दबाना

  • बहाना (Flow/Discharge):

    • किसी वस्तु को नदी/नहर में बहाना।
    • मतलब ग्रह की ऊर्जा को चौथे घर (चंद्रमा – सभी ग्रहों की मां) में भेजना।
  • दबाना (Suppress):

    • ग्रह की ऊर्जा को पूरी तरह खत्म कर देना (एक वर्ष तक)
  • कौन-सा करना है यह कुंडली की स्थिति पर निर्भर है।

    • उदाहरण:
      • यदि आठवें घर में खराब ग्रह हो → उसकी चीजें मंदिर (दूसरा घर) में दान नहीं करनी चाहिए।
      • अन्यथा परिणाम उल्टा हो सकता है।

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